गुरुवार, 14 नवंबर 2019

श्रीमद्भागवत महापुराण - लेख संख्या - 10 (मनु - शतरूपा की कन्याओं के वंश का वर्णन)

मनु और शतरूपा के दो पुत्र, प्रिय व्रत और उत्तानपाद थे और तीन पुत्रियां थीं, अकूति, देवहूति और प्रसूति। पुत्रों के वंश  का वर्णन अगले लेखों में किया जाएगा। इस लेख में  मनु  जी  की कन्याओं के केवल मुख्य मुख्य वंशजों के बारे में जानकारी  दी जाएगी:--
 1. अकूती का विवाह प्रजापति रुचि से हुआ। इनके पुत्र  रूप में भगवान विष्णु जी ने यज्ञ नाम से  अवतार  लिया।  भगवान यज्ञ के बारह पुत्र हुए।  यही स्वायंभुव मन्वन्तर  में  तुषित नाम के देवता हुए। यज्ञ भगवान ने अपने इन्हीं पुत्रों  के  साथ  मिल कर स्वायंभुव मनवन्तर की रक्षा की थी। उस समय के इन्द्र भी भगवान यज्ञ स्वयं ही थे।
 2. देवहूति का विवाह महर्षि कर्दम से हुआ जिसके  संबंध  में आप लेख संख्या नौ में पढ़ चुके हैं। इनके पुत्र  के  रूप  में  ही भगवान कपिल प्रकट हुए, जिन्होंने सांख्य दर्शन  का  सिद्धांत दिया। देवहूति की नौ कन्याओं का वंश वर्णन इस प्रकार है:
  १. कला का विवाह मरीचि ऋषि से हुआ। इनके दो पुत्र  हुए, कश्यप तथा पूर्णिमा। पूर्णिमा की  कन्या  हुई  देव  कुल्या  जो दूसरे जन्म में देव नदी गंगा के रूप में प्रकट हुई।
  २. अनसुईया का विवाह ऋषि अत्री से हुआ। इनके घर विष्णु जी ने दत्तात्रेय, शंकर जी ने दुर्वासा, और ब्रह्मा जी ने चंद्रमा के रूप में अंशावतार धारण किए।
  ३. श्रद्धा का विवाह ऋषि अंगिरा से हुआ।  इनके दो पुत्र एवं चार  कन्याएं हुईं।
  ४. हविर्भू का विवाह ऋषि पुलस्त्य जी से हुआ। इनके दो पुत्र हुए, महर्षि अगस्त्य और महा तपस्वी विष्वश्रवा।  विश्वश्रवा के इडविडा के गर्भ से  कुबेर का जन्म  हुआ  और  उनकी  दूसरी पत्नि केशिनी (कैकसी) से रावण कुंभकर्ण एवं विभीषण  हुए।
  ५. गति का विवाह ऋषि पुल्ह से हुआ। इनके तीन पुत्र हुए
  ६. क्रिया का विवाह कृतु से हुआ। इन्होने 60 हज़ार ऋषियों को जन्म दिया।
  ७. ऊर्जा (अरुंधति) का विवाह ऋषि वशिष्ठ जी से  हुआ था। इनके सात ब्रह्म ऋषि पुत्र हुए जिनके नाम हैं चित्रकेतु, सुरोचि, विरजा, मित्र, उल्बन, वसुभ्रधान  और  ध्युमान।  इनकी  दूसरी पत्नी से शक्ति आदि और भी पुत्र हुए।
  ८. चित्ती का विवाह अथर्व ऋषि से हुआ।  इनका  पुत्र  हुआ दधीचि जिसका दूसरा नाम अश्वशिरा भी था।
  ९. ख्याति का विवाह हुआ महर्षि भृगु जी से। इनके  वंश  में ही  आगे चलकर ऋषि मार्कणडेय और शुक्राचार्य भी हुए।
  3.मनु और शतरूपा की तीसरी पुत्री प्रसूति  का  विवाह  दक्ष प्रजापति से हुआ।  इनकी 16 कन्याएं हुईं।  स्वाहा  का विवाह हुआ अग्नि से, स्वधा का विवाह हुआ पितृ गणों से, और  सती का विवाह हुआ महादेव शिवजी से। इसके अलावा बाकी तेरह कन्याओं का विवाह धर्म से हुआ। इनमें से मूर्त्ति के गर्भ  से  दो पुत्र उत्पन्न हुए नर और नारायण। यह दोनों महान ऋषि थे। ये दोनों भी भगवान का ही अवतार माने जाते हैं। इन दोनों ने  ही द्वापर युग में अर्जुन और श्रीकृष्ण  के  रूप  में  अवतार  ग्रहण किया।
     दक्ष एवं प्रसूति की जिस कन्या का विवाह भगवान शिवजी भगवान से हुआ, उनकी कथा का विस्तार सहित वर्णन  अगले लेख में किया जाएगा।
                      । जय श्रीकृष्ण जी की ।

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