शुक्रवार, 8 नवंबर 2019

श्रीमद्भागवत महापुराण -- लेख संख्या --6 ( भगवान के चौबीस अवतार )

  पुराणों के अनुसार जब जब धर्म का ह्रास होता है और पृथ्वी पर  पाप  बढ़  जाता  है  तो  भगवान्  भांति भांति के अवतार धारण  करके  लोगों  की  पीड़ा हरते हैं। भगवान विष्णु जी के कुल चौबीस अवतार  कहे गए हैं।  इनमें  से दस अवतार मुख्य अवतार माने जाते हैं।  यह हैं, वाराह अवतार, मत्स्य अवतार,  कच्छप अवतार,  नृसिंह अवतार,  भगवान वामन का अवतार, परशुराम अवतार, राम अवतार, कृष्ण अवतार,  बुद्ध अवतार, और कल्कि अवतार।  श्री राम अवतार और श्री कृष्ण जी  के अवतार को पूर्ण अवतार माना गया  है  और  बाकी  के  सभी अवतारों  को  अंशावतार  कहा  गया है।  यह चौबीस अवतार इस तरह हैं:
  1. सनक, सनंदन, सनातन, सनत कुमार:    इन चारों को भगवान का  पहला  अवतार  माना गया है। इन्होंने अखंड ब्रह्मचर्य का पालन किया। वे सदा भगवान के ध्यान में मग्न रहते हैं।
  2. सूकर (वाराह)  अवतार:      इन्होंने  पृथ्वी  को  रसातल  से  बाहर लाने का कार्य किया था।  जब ब्रह्मा जी अपनी सृष्टि  के रहने  के  स्थान  के  बारे  सोच ही  रहे  थे, उसी समय  उनकी  नासिका  से भगवान  विष्णु अंगूठे  के आकार  के  प्रकट  हुए जिन्होंने  देखते  ही  देखते अपना  विशाल  रूप  बना   लिया।  उसी  समय  सभी देवताओं द्वारा उनकी स्तुति की गई। तब भगवान ने  सृष्टि  के रहने के लिए पृथ्वी को स्थापित किया। और  इसी अवतार  में भगवान ने हिर्रण्याक्ष का वध भी किया।
  3. देव ऋषि नारद जी:   इन्होंने पांच  रात्र  का उपदेश दिया  जिसमें कर्म के द्वारा ही कर्म बंधन से  मुक्ति  के  बारे  कहा  गया  है। पिछले जन्म में इन्होंने घोर तप किया था जिससे ब्रह्मा जी  ने इनको अपने मानस पुत्र के रूप  में  प्रकट  किया।  नारद  जी सदैव धर्म को गति प्रदान करने  और लोक कल्याण करने  में लगे रहते हैं।
  4. नर - नारायण अवतार:    भगवान ने दो ऋषियों  के  रूप  में  अवतार धारण कर मन- इन्द्रियों के संयम से घोर तपस्या की और धर्म की स्थापना की।
  5. कपिल देव अवतार:   महर्षि कर्दम और माता  देवहुती के  पुत्र के रूप में भगवान ने पांचवां अवतार लिया। कपिल  मुनि  जी  सिद्धों के स्वामी कहे जाते हैं। इन्होंने सांख्य शास्त्र का उपदेश किया है। 
  6. दत्तात्रेय जी:   इन्होंने देवी अनसूया और ऋषि अत्री जी के पुत्र के रूप  में  अवतार  लिया। और  अलर्क  आदि  ऋषियों  को उपदेश भी दिया।
  7. यज्ञ अवतार:   इन्होंने ही अपने पुत्रों को साथ लेकर  स्वयंभुव मन्वन्तर की रक्षा की थी।
  8. ऋषभ देव अवतार:   इन्होंने ही परमहंसों का मार्ग दिखलाया है।
  9. राजा पृथु अवतार:   इन्होंने ही पृथ्वी से समस्त औषधियों का दोहन किया था।
  10. मत्स्य  अवतार :     पृथ्वी  रूपी  नौका  पर  बैठाकर  अगले मन्वन्तर के अधिपति वैवस्वत मन्वन्तर की रक्षा की।
  11. कच्छप अवतार:   समुद्र मंथन में आधार का कार्य किया।
  12. धन्वंतरी अवतार:   समुद्र मंथन के समय समुद्र में से  अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। आज भी धनतेरस के दिन इनकी पूजा की जाती है।
  13. मोहिनी अवतार:   अमृत लेकर भागे रक्षाशों  से अमृत  लेकर देवताओं को पिलाया।
  14. नृसिंह अवतार:   हिरण्यकशिपु को मार कर प्रहलाद की रक्षा की।
  15. वामन अवतार:   बली से दान मांगकर बली और देवताओं का कल्याण किया।
  16. हयग्रीव अवतार:   इन्होंने दैत्यों से वेदों की रक्षा की।
  17. श्री हरि अवतार:   गजेन्द्र नामक हाथी और मगरमच्छ दोनों का ही उद्धार किया।
  18. श्री परशुराम अवतार:।  इन्होंने उनके समकालीन क्षत्रियों, जो कि पापी और अत्याचारी हो चुके थे, को मारकर उनसे लोगों की रक्षा की।
  19. भगवान व्यास जी:   ऋषि पाराशर जी और सत्यवती जी के पुत्र के रूप में प्रकट हुए। 18 पुराणों और महाभारत की रचना की। वेद को भी चार भागों में विभाजित किया।
  20. हंस अवतार:   इस अवतार में भगवान ने सनत कुमारों और नारद जी को उपदेश दिया।
  21. श्री राम अवतार:   रावण आदि राक्षसों का वध किया, संतों को दर्शन दिए और समाज में मर्यादा स्थापित करके मर्यादा पुरषोत्तम कहलाए।
  22. श्री कृष्ण अवतार:   कंस आदि पापियों का वध किया, गीता का उपदेश दिया, और दैवी प्रेम की मर्यादा बताई। पृथ्वी को पाप मुक्त किया।
  23. बुद्ध अवतार:   कलयुग आ जाने पर देवताओं के द्वेशी दैत्यों को मोहित करने के लिए अजन के पुत्ररूप में अवतार धारण करते हैं।
  24. कल्कि अवतार :   कलयुग के अंत में भगवान जगत की रक्षा के लिए कल्कि अवतार धारण करते हैं।
        इस तरह से पुराणों में चौबीस अवतारों का वर्णन मिलता है। कुछ अवतारों के बारे  में कई पुराणों के मत भिन्न  हैं। ऐसा इस लिए है क्योंकि कुछ अंश अवतारों को कई ग्रंथों ने अवतार माना है और कईयों ने नहीं माना। परंतु ज्यादा अवतारों के बारे ऐसा नहीं है । यहां पर  संक्षिप्त  में  अवतारों के बारे में  बताया गया है। अगले लेखों में  जहां जहां पर जिस  अवतार की कथा आएगी उसको विस्तार से बताएंगे। अगले लेख में मनु जी और शतरूपा जी से आगे सृष्टि कैसे बढ़ी, इसके बारे में वर्णन किया जाएगा।
                      जय श्रीकृष्ण जी की
      

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